
जनगणना–2027 को लेकर गंभीर मंथन
देहरादून में स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में शनिवार को “अपनी गणना अपने गांव” अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। जिसमे विभिन्न मुद्दों को लेकर चर्चा की गयी, 2026 से जुड़े मुद्दों पर्वतीय चित्रों में घटती जनसंख्या तथा इसके राजनितिक और विकासात्मक प्रभावों पर गंभीरता से चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने एक स्वर में कहा की आगामी जनगणना केवल आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के भविष्य, प्रतिनिधित्व और संतुलित विकास से सीधा जुड़ा हुआ है
चर्चा के दौरान यह स्पष्ट भी सपष्ट किया गया की के आधार पर ही पंचायतों, नगर निकायों और जिलों के बजट, विभिन्न सरकारी योजनाओं का आवंटन तथा लोकसभा, विधानसभा एवं स्थानीय निकायों का परिसीमिन निर्धारित होता है।
जनगणना केवल आंकड़े नहीं, भविष्य का सवाल
जनगणना के दौरान हुई क्या हुई चर्चा: बैठक में बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, यदि आगामी परिसीमन 2027 की संभावित के जनसंख्या आधार पर किया गया तो, 9 पर्वतीय जिलों की विधानसभा सीटें घटकर लगभग 39 रह सकती है जबकि चार मैदानी जिलों की सीटें बढ़कर 66 तक पहुँच सकती है। इसे राज्य निर्माण के मूल उदेश्यों के विपरीत बताया गया।
प्रवासियों को जोड़ने पर जोर
वक्ताओं ने पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए बताया की वर्ष 2020 तक लगभग 4 लाख प्रवासी अस्थायी रूप से अपने गांव लौटे थे। इससे यह स्पष्ट होता है की प्रवासी समाज आज भी अपने मूल गांवों से भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सुझाव दिया की यदि सही रणनीति अपनायी जाये तो जनगणना के दौरान 5 से 6 लाख सही लोगों की गांवों में उपस्थिति सुनिश्चित कर पर्वतीय जिलों की में जनसंख्या वृद्धि की जा सकती है।
बैठक की अध्यक्षता डॉ आर रतुड़ी ने की। इस अवसर पर श्री जोत सिंह बिष्ट, सौरभ , मथुरा मैठानी, दत्त जोशी, जयसिंग रावत ,भरत सिंह राय सिंह, रावत, प्रदीप कुकरेती, मनोहर लाल नौटियाल नरेंद्र सिंह,सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक के आगामी कार्यकर्मों के क्रियान्यवन हेतु एक संयोजक मंडल का गठन भी किया गया। और एक पहुंचाने और सही जानकारी प्रसारित करने के लिए समन्वित प्रयासों पर बल दिया।



